राजनीति
  • रिफ़ार्म के रत्न हैं रतन टाटा – मुकेश अंबानी

    मुकेश अंबानी (चेयरमैन, रिलायंस इंडस्ट्रीज) 1991 से पहले, भारत राजनीतिक रूप से भले ही आजाद था, लेकिन यहां आर्थिक स्वतंत्रता नहीं थी. बहुत सारे युवाओं की तरह मेरे बच्चों को भी लगता था कि सरकार कारोबारियों की प्रतिभा पर बंदिशें लगा रही है. यह नौकरशाह तय करते थे कि किस कंपनी को क्या व्यापार करना है, उन्हें कितना उत्पादन और निर्यात करना है, विकास के लिए वे अपनी पूंजी को कितनी बढ़ा सकते हैं, कितने लोगों को नौकरी दे सकते हैं और किस तरह के उत्पाद या सेवाएं बेच सकते हैं.

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