विचार मंच

  • लोकसभा चुनाव से पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल-जयंती पर दिखेगी भाई-बहन की ताकत : वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमार।

    रिश्ते की पवित्रता ने हमेशा ही मजबूती दी है, चाहे पारिवारिक मामला हो या राजनैतिक। अभी बीते दिनों हीं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने आईएनएलडी नेता अभय सिंह चौटाला को राखी बांध भाई-बहन संबंध को मजबूती दी। इससे दोनो नेताओं ने जहां एक ओर सामाजिक संदेश दिया वहीं राजनीतिक मजबूती भी प्रदान की एक-दूसरे को। भाई-बहन के संबंध कायम रहे तो आने वाले लोकसभा और विधान सभा चुनाव में इसके परिणाम दिखेगें।

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  • क्या पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान फौज के चंगुल से निकल पायेगें या उसकी कठपुतली बनेंगे : वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह ।

    (वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह)। पाकिस्तान में क्रिकेटर इमरान खान की सरकार से दुनिया के अमन पसंद लोगों को बहुत उम्मीदें हैं . सारी दुनिया में लोग टकटकी लगाये बैठे हैं कि शायद इमरान खान कोई ऐसी पहल करें जिससे इस खित्ते में शान्ति की बहाली हो सके. पाकिस्तान में शान्ति और लोकतंत्र स्थापित होने का सबसे ज़्यादा फायदा पकिस्तान की अवाम को होगा, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को होगा और पाकिस्तानी राष्ट्र को होगा. पाकिस्तान में शान्ति और लोकतंत्र की स्थापना का अगर किसी बाहरी देश को फायदा होगा तो वह भारत है. भारत को बाकी देशों से ज़्यादा लाभ होगा . उसके कारण हैं साफ़ हैं . एक तो पाकिस्तान के पूरे समर्थन और उसकी साझीदारी से चल रहा आतंकवाद का खात्मा करने में दुनिया को मदद मिलेगी. भारत की एक बड़ी आबादी के बहुत सारे रिश्तेदार पाकिस्तान में रहते हैं , शादी ब्याह के रिश्ते हैं और आपस में रिश्तेदारों की मुलाकातें कई कई साल नहीं हो पातीं . अगर अमन की स्थापना हुयी तो दोनों देशों में बंटे हुए परिवारों में आपसी मेल मुलाकातें भी बढेंगी . जब दोनों देशों के अवाम में आपसी सम्बन्ध बढ़ेगा ,आवाजाही होगी तो दोनों ही देशों की जनता के हितों को ध्यान में रखकर सरकारें भी फैसले लेने के लिए मजबूर होंगी.

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  • मुजफ्फरपुर बलात्कार गृह नीतीश के पाखंड का पर्दाफाश - वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र प्रसाद

    (नवभारत टाइम्स के पूर्व रेजिडेंट संपादक उपेन्द्र प्रसाद)। मुजफ्फरपुर की एक बालिका गृह में रह रही 44 बच्चियों में से कम से कम 34 बच्चियों के साथ बलात्कार का मामला सामना आया है। वह बालिका गृह एक एनजीओ चलाता है, लेकिन से राज्य की नीतीश सरकार से 34 लाख रुपये सालाना उस गृह के रखरखाव और बच्चियों पर खर्च करने के लिए मिलता है। उसमें उन बच्चियों को रखा जाता है, जो अपने मां-बाप से बिछुड़कर सड़कों या रेलवे स्टेशनों पर भटकती हुई पुलिस को मिलती है। उनके मां- बाप को उन्हें सौंपने तक उन बच्चियों को पुलिस मुजफ्फरपुर की कथित बालिका गृह जैसे संस्थानों को सुपुर्द कर देती है। कहने को तो सामाजिक कार्यों में लगे लोग उस तरह के अस्थाई शेल्टर होम चलाते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में पैसे सरकार के ही खर्च होते हैं। मुजफ्फरपुर को वह अस्थाई शेल्टर होम भी बिहार सरकार के पैसे से ही चल रहा था। जितना उस शेल्टर होम पर उस एनजीओ का खर्च होता था, उससे कहीं ज्यादा सरकार से उसे मिल भी जाता था। खर्च एनजीओ की जेब से होता था या सरकारी खजाने से- यह सवाल अब उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना महत्वपूर्ण यह तथ्य है कि वहां लड़कियों के साथ दरिंदगी की जा रही थी और 6 या 7 साल की मासूमों तक से बलात्कार किया जा रहा था। मेडिकल जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है कि जिन बच्चियों के साथ बलात्कार हुए उनकी उम्र 6 साल से 18 साल के बीच थी। उन बलात्कारियों में एक उस एनजीओ का संचालक ब्रजेश ठाकुर भी था। उस गिरफ्तार कर लिया गया है।

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  • मॉब-लिंचिंग पर रोक लगाने की जरूरत। इसके लिये राजनीतिक दलों के बीच एक विचार जरूरी – पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल।

    आजकल का दौर टेक्नोलॉजी का है। ऐसे में यदि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सही तरीके से किया जाये तो यह आम लोगो के लिये व्यापक-लाभदायक है लेकिन इसी टेक्नोलॉजी के माध्यम से गलत लोग इसका गलत इस्तेमाल कर बडे पैमाने पर लोगो को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक तरह से यह आतंकवादियों के लिये एक प्लेटफॉर्म बन चुका है। यह माफियाओँ को ड्रग्स तस्करी, बच्चो का शोषण, मांस व्यापार से धन कमाना और अन्य विनाशकारी व गैरकानूनी गतिविधियों के लिये भी एक आधार बन गया टेक्नोलॉजी के माध्यम से किसी व्यक्ति को निशाना बनाया जा सकता है। सांप्रदायिक दंगे को अंजाम दिया जा सकता है। इतना ही नहीं राजनीतिक और वैचारिक प्रवृत्तियों को गति प्रदान कर सकता है। अब अफवाहें तेजी से फैलाई जा रही हैं। भीड द्धारा लोगो की पिटाई व हत्या रोजमर्रा की बात हो चुकी है। इंटरनेट पर नकली खबरों का प्रसार एक सामाजिक खतरा बन गया

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  • बतौर मुख्यमंत्री मोदी को इंटरव्यू के दौरान अपमानित करना चाहते थे मिस्टर करन थापर। पत्रकरिता को भारी नुकसान पहुंचाया : वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह।

    शैतान के वकील नाम का टीवी प्रोग्राम चलाने वाले , विख्यात पत्रकार करन थापर की किताब आई है . नाम है Devil’s Advocate जिसका हिंदी अनुवाद है , ‘ शैतान के वकील ‘. उसी किताब का एक अंश आजकल चर्चा में हैं जिसमें करन थापर ने अपने उस इंटरव्यू का ज़िक्र किया है जो उन्होंने २००७ में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ किया था . करीब तीन मिनट का वह इंटरव्यू उन दिनों बार बार दिखाया गया था . जितनी बातचीत दिखाई गयी थी ,उससे साफ़ लगा रहा था कि कोई थानेदार किसी अभियुक्त से पूछताछ कर रहा था.पत्रकारिता के कई बड़े विद्वानों ने उस वक़्त भी कहा था कि करन थापर का अहंकार उस इंटरव्यू का स्थाई भाव था. दूसरी बात यह थी कि इंटरव्यूकर्ता यह भूल गए कि जब भी हम किसी का इंटरव्यू करते हैं तो सवाल पूछना पत्रकार का विशेषाधिकार होता है लेकिन जवाब देना हमेशा उस व्यक्ति का अधिकार है जिससे बातचीत की जा रही है . किसी भी सवाल का जवाब न देने, या उस पर चुप हो जाने या उस सवाल का अपनी समझ के अनुसार जवाब देना उसका अधिकार होता है. जब यह इंटरव्यू हुआ था तो मैं पत्रकारिता के एक संस्थान में ब्राडकास्ट जर्नलिज्म का शिक्षक था. उस इंटरव्यू के बारे में मैंने बहसें की थीं और जितने भी वरिष्ठ लोगों से मैंने बात की सबने यही कहा कि वह पत्रकारिता के पैमाने पर खरा नहीं उतरता .यहाँ यह ध्यान देना ज़रूरी है कि मैंने जिन लोगों से बात की थी वे सभी नरेंद्र मोदी के खिलाफ लिख रहे थे और टीवी में भी उनके कार्यों के बारे में आलोचनात्मक रुख रखते थे. मैं खुद उन दिनों छपता नहीं था क्योंकि मेरी नौकरी पढ़ाने की थी. इसलिए मैएँ खुद कुछ नहीं लिखा था .

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  • न्याय की गुणवत्ता : न्यायमूर्ति गोगोई सही है। कार्यकारी के साथ न्यायपालिका-संघ लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा - कांग्रेस लीडर व प्रतिष्ठित एडवोकेट कपिल सिब्बल।

    एक स्वतंत्र निडर न्यायपालिका‘लीटमोटीफ’है जो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करती है। इसके बिना, संविधान सिर्फ एक मृत पत्र के समान होगा, जैसे एक शरीर बिना आत्म के। कानून के अनुसार न्याय वितरण में, अदालत ने कार्यकारी अधिकारियों को नीतियां दी जो एक प्रकार से विधायिका पर प्रहार है। नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा में इसकी सतर्कता और सक्रिय भूमिका उन लोगों को चेतावनी है जो हमारे संविधान के मूल्यों को कम करना चाहते हैं। इस तरह के सतर्कता के बिना, देश अपनी लोकतांत्रिक जीवनशैली खो देगा। इसलिए न्यायाधीशों के लिए उत्साहपूर्वक अदालत की स्वतंत्रता और अखंडता की रक्षा करने के लिए न केवल हमारे लिए बल्कि सभी के लिए, इसे बिना किसी सुरक्षा के लिए लागू किया गया है। न्यायाधीश को यह समझना होगा कि वह अपनी दृष्टि और भारतीय लोकतंत्र की स्थिति की समझ, दोनों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करे। क्योंकि हमारा देश आज चुनौतियों से जूझ रहा है। ये सायरन आवाज आने वाले वर्षों तक हमारे कानों में गूंजेगी।

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  • बुराड़ी कांड के पीछे क्या था? लगे रहो मुन्ना भाई’के केमिकल लोचे ने फंदे पर लटकाया - वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र प्रसाद।

    (नवभारत टाइम्स के पूर्व रेजिडेंट संपादक उपेन्द्र प्रसाद)दिल्ली की बुराड़ी में 11 लोगों की मौत की गुत्थी लगभग पूरी तरह सुलझ गईहै। लोगों को दहलाने वाली इस घटना ने राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीयख्याति पा ली। एक साथ एक संयुक्त परिवार के सभी 11 सदस्यों का फांसी परलटक कर मर जाना अपने आप में एक दहशत भर देने वाली घटना थी। इस तरह कीघटना कम से कम भारत में नहीं हुई थी कि एक ही परिवार के इतने सारे सदस्यएक साथ अपने ही घर में फांसी के फंदे पर लटकते पुलिस को लगा था कि उन सबकी हत्या हुई है, क्योंकि घर के रसोईघर में अगली सुबह के बे्रकफास्ट की तैयारी शाम को कर दी गई थी। यानी यह साफ था कि उन लोगों का इरादा आत्महत्या करने का नहीं था। लेकिन पुलिस को इस आश्चर्य इस बात पर हो रहा था कि घर में सबकुछ सामान्य था। यदि हत्यारों के गिरोह होते और उतने सारे लोगों की हत्या होती, तो घर में संघर्ष के निशान अवश्य होते। घर में कुछ न कुछ टूट फूट तो जरूर ही होती। लेकिन वैसा कुछ नहीं था।

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  • जस्टिस गोगोई की पीड़ा : वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण किशोर पांडेय

    सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ जज रंजन गोगोई ने हाल के एक व्याख्यान में देश के हालात पर एक व्याख्यान दिया है जो वास्तव में आज देश की सही तस्वीर पेश करता है। जस्टिस गोगोई ने अपनी ओर से यह सुझाव भी दिया है कि हालात को सुधारने के लिए जरूरी यह है कि न्यायाधीश चुप्पी तोड़ें और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें। इतना ही नहीं, पत्रकारों को और न्यायपालिका को स्वतंत्र रहते हुए स्वतंत्र सोच के साथ अगली पंक्ति में आकर अपनी आवाज को बुलंद करना होगा। उन्होंने व्याख्यान में जो कुछ कहा उसका अर्थ भी बिलकुल साफ है। वह यह है कि समाज के विभिन्न वर्गों को जो कुछ करना चाहिए वे नहीं कर पा रहे हैं। संभावनाएं दोनों हैं- एक तो यह कि वे सब-कुछ समझते हैं, करना भी चाहते हैं लेकिन उन्हें करने नहीं दिया जाता। और दूसरी संभावना यह है कि वे खुद ही अपने को इतना कमजोर महसूस कर रहे हैं कि करने के लिए उनके मन में दिलचस्पी बची ही नहीं है। जस्टिस गोगोई के व्याख्यान से यह निष्कर्ष निकलता है कि यदि समाज का प्रबुद्ध वर्ग अपने कर्तव्य पालन से चूकता रहा तो स्थितियां दिन-पर-दिन बदतर होती जाएंगी और फिर ऐसा भी हो सकता है कि स्थितियां नियंत्रण से बाहर हो जाए। भारत कैसे मजबूत हुआ और उसकी मजबूती कैसे बढ़ सकती है उस रास्ते को छोड़कर अगर यहां के लोग उन रास्तों पर चलना शुरू करें जिनसे स्थितियां और खराब होंगी तो परिणाम भी सामने है और वह परिणाम कितना भीषण होगा उसकी कल्पना भयावह ही लगती है।

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  • नीतीश कुमार मझधार में तेजस्वी ने इरादे पर फेरा पानी : वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र प्रसाद

    (नवभारत टाइम्स के पूर्व रेजिडेंट संपादक उपेन्द्र प्रसाद) लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारो को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से बातचीत होने वाली है। लेकिन उसके पहले नीतीश अपने आपको कमजोर पा रहे हैं। कुछ दिन पहले उनकी पार्टी के प्रवक्ता और वे खुद भी कुछ ऐसे तेवर दिखा रहे थे, मानो यदि भाजपा ने उनकी बात नहीं मानी, तो पता नहीं वह क्या कर देंगे। वे भाजपा नेताओं पर दबाव बना रहे थे और कह रहे थे कि उनके बिना बिहार में भाजपा जीत हासिल कर ही नहीं सकती, जबकि सच यह है कि 2014 में भाजपा उनके बिना चुनाव लड़ रही थी और वे भाजपा के बिना चुनाव लड़ रहे थे। तब भाजपा को 22 सीटें मिली थीं और उनकी पार्टी को सिर्फ 2 सीटें और वे दोनों भी बहुत ही मामूली मतों के अंतर से।

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  • बेमेल गठबंधन था बीजेपी और पीडीपी के बीच - कांग्रेस लीडर कपिल सिब्बल।

    बेमेल गठबंधन था बीजेपी और पीडीपी के बीच। यह गठबंधन के समय से ही कहा जा रहा था कि दोनो ही पार्टियों के विचार एक दूसरे से कोसो दूर हैं एक दक्षिण ध्रुव है तो दूसरा उत्तरी ध्रुव। पीडीपी से गठबंधन और जम्मू-कश्मीर मे सरकार बनाने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबकुछ ताक पर रखने के इच्छुक थे। यहां तक कि चुनाव के दौरान उन्होंने पिता-पुत्री मोहम्मद सईद और मेहबूबा मुफ्ती के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाये, जो एक तरह से कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाया जाता रहा।

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