रास चुनाव में बीजेपी को झटका, कांग्रेस और झामुमो के उम्मीदवार जीते।

रास चुनाव में बीजेपी को झटका, कांग्रेस और झामुमो के उम्मीदवार जीते।

कुंदन सिंह की रिपोर्ट -

झारखंड में बीजेपी और उसकी सहयोगी दलों की सरकार है लेकिन बीजेपी झारखंड में अपने हीं राज्य सभा उम्मीदावर एस एस आहलुवालिया को चुनाव नहीं जीता पाई। दो सीटों के लिये हुए चुनाव में एक सीट सत्तारूढ झामुमो के उम्मीदवार संजीव कुमार के पक्ष में गया और दूसरा विरोधी दल कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप बालमुचू के पक्ष में।

इस चुनाव के परिणाम ने एक ओर जहां कांग्रेस के उत्साह को चार गुणा कर दिया है वही दूसरी ओर यह बीजेपी के लिये करारा झटका है। आइये एक नजर डालते हैं इस चुनाव परिणाम के विश्लेषण पर। सबसे पहले सत्तारूढ बीजेपी की ओर –

बीजेपी और झामुमो गठबंधन - यहां बीजेपी गठबंधन में मुख्य रूप से चार पार्टियां है – बीजेपी, झामुमो, आजसू और जदयू। इनमें से बीजेपी और झामुमो के पास 18-18 विधायक हैं। इनके अलावा आजसू के पास 5 और जदयू के पास 2 विधायक हैं। गठबंधन की दोनों सबसे बड़ी पार्टियां बीजेपी और झामुमो मिलकर लडने की वजाय एक दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिये। नतीजा बीजेपी की हार। झामुमो ने बीजेपी से आग्रह किया था कि वह उनके उम्मीदवार का समर्थन करे लेकिन बीजेपी ने ऐसा नहीं किया।

झारखंड विकास मोर्चा और सीपीआई(एमल) के चुनाव में हिस्सा न लेने की वजह से जो समीकरण उभरे, उसमें जीत के लिये एक उम्मीदवार को 23 मतो की जरूरत थी। आजसू ने अपने पांच विधायकों का समर्थन झामुमो के पक्ष में देकर झामूमो उम्मीदवार संजीव कुमार की जीत सुनिश्चित कर दी। झामुमो के 18 विधायक और आजसू के 5 विधायकों को मिलाकर कुल संख्या 23 तक आराम से पहुंच गई। लेकिन बीजेपी के लिये संकट हो गया। बीजेपी के 18 और जदयू के 2 विधायकों को मिलाकर यह आंकड़ा 20 तक ही पहुंच पाई और नतीजा बीजेपी उम्मीदावर एस एस अहलूवालिया को हार का सामना करना पड़ा।

इतना ही नहीं बीजेपी ने निर्दलीय उम्मीदवारो का मैनजमेंट भी नहीं कर सकी। वे विधायक भी बीजेपी के पक्ष में वोट नहीं किया जो सरकार को समर्थन दे रखे हैं। निर्दलीय विधायक विदेश सिंह और विधायक चामरा लिंडा ने झारखंड में बीजेपी की सरकार को समर्थन दे रखा है लेकिन राज्य सभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में अपना मतदान किया।

कांग्रेस गठबंधन – इस चुनाव में कांग्रेस गठबंधन के बिखर जाने के बावजूद कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार प्रदीप बालमुचू ने शानदार जीत हासिल की। कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा रहे झारखंड विकास मोर्चा यानी जेवीएम ने मतदान में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया था। इससे प्रदीप बालमुचू की जीत संदिग्ध हो गई। क्योंकि जेवीएम के पास 11 विधायक थे। लेकिन आरजेडी ने कांग्रेस उम्मीदवार बालमुचू को समर्थन देने का निर्णय लिया। आरजेडी के पांच विधायक का समर्थन हासिल होते हीं कांग्रेस पार्टी में उत्साह आ गई है। कांग्रेस के 13 और आरजेडी के 5 विधायकों को मिलाकर संख्या 18 तक पहुंच गई। बस जरूरत थी सिर्फ और पांच वोटो की। ऐसे में एमसीसी के एक विधायक अरूप चटर्जी ने कांग्रेस को समर्थन किया। राज्य सरकार को समर्थन दे रहे विधायक चामरा लिंडा और विदेश सिंह ने भी कांग्रसे के पक्ष में वोट किया। इनके अलावा अन्य निर्दलीय विधायक बंधु तिर्की, गीता कोड़ा, एनोस एक्का और हरि नारायण ने भी कांग्रेस के पक्ष में वोट किया। इस प्रकार प्रदीप बालमुचू के पक्ष में कुल 25 मत पड़े।

जेवीएम – जेवीएम झारखंड की तेजी से उभरती एक राजनीतिक पार्टी है। वर्तमान में इनके पास 11 विधायक हैं। जेवीएम पिछले चुनाव में कांग्रेस की सहयोगी रही है लेकिन राज्य सभा के चुनाव में जेवीएम ने मतदान में हिस्सा हीं नहीं लिया। जेवीएम अध्यक्ष बाबू लाला मरांडी ने कहा कि वे काफी समय से कांग्रेस से अलग है। उनकी पार्टी पिछले कई उपचुनाव में अलग अलग लड़ी है। जेवीएम अगला विधान सभा चुनाव अपने दम पर सभी 81 सीटों पर लड़ेगी।

बहरहाल, 20 मार्च को चुनाव होना था। चुनाव भी हुए लेकिन खरीद-फरोख्त की खबर मिलने के बाद चुनाव आयोग ने इसे रद्द कर दिया। और नये सिरे से चुनाव 3 मार्च को हुए।