शिक्षा मंत्री स्मृति के शिक्षा पर सवाल।

शिक्षा मंत्री स्मृति के शिक्षा पर सवाल।

नई दिल्ली। मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की शिक्षा को लेकर विवाद हो गया है। इसको लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने सामने आ चुकी है। अभिनेत्री से मंत्री बने स्मृति ईरानी पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने लोकसभा चुनावों के लिए दिए गए ऐफिडेविट में गलत जानकारी दी है। उनके अलग अलग समय में दिये गये दो एफिडेविट में शिक्षा के बारे में अलग अलग जानकारियां है। और यही बना विवाद का कारण। 

स्मृति ईरानी के खुद के ऐफिडेविट में इस तरह की विसंगति के आरोप ने कांग्रेस को एक बार फिर हमलावर रुख अपनाने का मौका दे दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि उनकी पार्टी स्मृति ईरानी पर कोई निजी हमला नहीं कर रही है। यह दो अलग-अलग ऐफिडेविट का मामला है। सिंघवी ने कहा कि स्मृति ईरानी ने अपने ऐफिडेविट में गलत जानकारी दी है, जो कि एक क्रिमिनल ऑफेंस है।

2004 में स्मृति ईरानी ने दिल्ली के चांदनी चौक से कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय स्मृति ने अपनी शैक्षणिक योग्यता बीए बताई थी। 2004 में दिए गए ऐफिडेविट के मुताबिक स्मृति ने बीए की डिग्री 1996 में पूरी की थी। जबकि इस बार के लोकसभा चुनाव में स्मृति जब अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतरीं तो उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता बी कॉम फर्स्ट ईयर बता दी। ऐफिडेविट के मुताबिक स्मृति ने 1994 में इसे पत्राचार से करने की बात कही है। 

ऐसे में साफ है कि या तो 2004 का ऐफिडेविट सही है या फिर 2014 का। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसपर चुटकी लेते हुए कहा कि स्मृति का कौन सा ऐफिडेविट सही यह सिर्फ बीजेपी ही बता सकती है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी इसपर तंज कसते हुए कहा है कि अगर पीएम को मुरली मनोहर जोशी से बेहतर स्मृति ईरानी लगीं, तो यह उनका फैसला है। बता दें कि जोशी वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन मंत्री थे, लेकिन मोदी कैबिनेट में उन्हें जगह नहीं मिली है।

स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास मंत्री बनाने के फैसले पर कांग्रेस नेता अजय माकन और नरेंद्र मोदी की समर्थक मानी जाने वाली मशहूर लेखिका और पत्रकार मधुकिश्वर ने सवाल खड़े किए हैं। माकन और मधुकिश्वर ने स्मृति को एचआरडी मिनिस्ट्री देने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि अंडर ग्रैजुएट होने के बावजूद उन्हें देश की शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी कैसे दे दी गई है।

वहीं बीजेपी ने भी हमलावर रूख अपनाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के शिक्षा पर सवाल उठाये। जदयू अध्यक्ष शरद यादव और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मंत्री बनने के लिये डिग्री को कोई मापदंड नही है। शरद ने कहा कि काम की आलोचना होनी चाहिये वहीं उमर ने कहा कि क्या सिविल एविएशन मंत्री बनने के लिये पायलट होना जरूरी है। 

इस पर सफाई देते हुए कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनका सवाल डिग्री के स्तर को लेकर नही है बल्कि हलफनामें में दो अलग अलग डिग्री देने को लेकर है।