‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ के संकेत ।

‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ के संकेत ।

इन दिनों हर जगह भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गूंज है। और कहा जा रहा है कि अच्छे दिन आने वाले हैं।  अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूपये को जहां मजबूती मिली, वहीं सोने के दाम में भी गिरावट आई। शेयर बाजार में सूचकांको में ऐतिहासिक बढोतरी देखी गई।  इतना हीं नहीं शपथ समारोह के दिन ‘सार्क’ सदस्यों को आमंत्रित कर उन्होंने सकारात्मक संदेश दिया। 

लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी नेता नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया था कि चुनाव के दौरान जो कुछ भी कहा गया वह चुनाव प्रचार का एक हिस्सा था। लेकिन देश के बनाने के लिये सभी लोगों की जरूरत है। और 16 मई को वोटो की गिनती में जैसे ही भारी सफलता मिली शाम को बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने साफ ऐलान किया कि कोई भी भडकाऊ भाषण नहीं देगा। और शांति बनाये रखेंगे। 

शांति की अपील – बिहार बीजेपी के नेता गिरिराज सिंह नरेंद्र मोदी के बड़े समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने यहां तक बयान दे दिया कि जो लोग नरेंद्र मोदी को नेता नहीं मानते उनकी जगह पाकिस्तान में है। इस बयान ने देश में तूफान खड़ा कर दिया। हालांकि नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के तमाम बड़े नेता ने इस  बयान की निंदा की। इसी बीच गिरिराज ने इसी प्रकार के बयान एक बार फिर दे दी। इसलिये 16 मई को जीत के बाद बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह अपने प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी के नेताओं को हिदायत दी कि कोई भी भड़काऊ भाषण न करे। इसे बीजेपी का सकारात्मक पहल माना गया। 

शेयर बाजार में ऐतिहासिक उछाल – 16 मई मतगणना के दिन लोकसभा चुनाव के नतीजों में एनडीए को बहुमत मिलने से उत्साहित सेंसेक्स ने लंबी छलांग लगाई । सेंसेक्स में 1 हजार अंकों का रिकार्ड उछाल दर्ज किया गया है। सेंसेक्स 25 हजार के आंकड़े को पार कर ऐतिहासिक स्तर पर पहंचा गया है। यह सेंसेक्स का अबतक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक उछाल है। 

सार्क सदस्य देशों को निमंत्रण – नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद शपथ समारोह के लिये दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को आमंत्रित किया। इसे पड़ौसी देशों के साथ संबंध बहाल करने की दिशा में एक अच्छा संकेत माना जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी नवाज शरीफ आ रहे हैं। सार्क सदस्य देश हैं - भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, भूटान और अफगानिस्तान हैं। बहरहाल दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। इसकी स्थापना 8 दिसंबर, 1985  को भारत,पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान द्वारा मिलकर की गई थी। अप्रैल 2007 में संघ के 14 वें शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान इसका आठवां सदस्य बना। 

बहरहाल ये तो शुरूआती दौर है । आने वाले दिनों में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है मोदी सरकार को। क्योंकि भारत जैसे विशाल देश को चलाने के लिये नरेंद्र मोदी के पास उपयुक्त व्यक्ति की कमी दिखती है। उनके टीम में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह जैसे अनुभवी लोग नहीं होंगे।