नक्सली हमले में पाकुंड के एसपी समेत 7 की मौत ।

नक्सली हमले में पाकुंड के एसपी समेत 7 की मौत ।

नक्सली हमले में पाकुंड के एसपी समेत 7 की मौत ।

रांची। झारखंड के पाकुड़ जिले की सीमा के निकट काठीकुंड में  नक्सलियों ने घात लगाकर पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इस हमले में पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक अमरजीत बलिहार समेत सात पुलिस जवानों की मौत हो गई। यह हमला 2 जुलाई को दोपहर तीन बजे के आसपास की गई।

यह हमला उस समय किया गया जब जब एसपी अमरजीत सिंह दुमका जिले में पुलिस उपमहानिरीक्षक की बैठक में शामिल होने के बाद पाकुंड जा रहे थे। बताया जाता है कि जब एसपी अमरजीत बलिहार का काफिला काठीकुंड की ओर से पाकुड़ की ओर बढ़ रहा था तब घने जंगलों में छिपे नक्सलियों ने काफिले पर चारों तरफ से गोलीबारी प्रारंभ कर दी। चारो ओर से घिरे पुलिस के जवानो ने भी गोलीबारी की।

 एसपी अमरजीत ने राष्ट्रपति शासन के दौरान पिछले माह ही पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाली थी।  इससे पूर्व वह रांची में स्पेशल ब्रांच और अन्य अनेक जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। बताया जाता है कि एसपी अमरजीत नक्सलियों के हिट लिस्ट में थे।

 हिन्दुस्तान.कॉम के अनुसार - वर्ष 2005 से पहले लातेहार नक्सलियों के आतंक से खून के आंसू रो रहा था। सरकार की काफी फजीहत हो रही थी। तब डीएसपी रहे अमरजीत बलिहार ने खुद वहां जाने की इच्छा जाहिर की थी। 2005 से 2007 के बीच लातेहार में अमरजीत ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी। उसी वक्त से वे नक्सलियों की हिटलिस्ट में थे।

 अमरजीत बलिहार नक्सलियों के घोर विरोधी थे। बतौर डीएसपी जब वे लातेहार में तैनात थेतब उन्होंने वहां नक्सलियों के विरुद्ध बड़ा अभियान चलाया था। नक्सलियों का साथ देने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। उस समय से ही नक्सलियों ने इन्हें हिटलिस्ट में रखा था।

 लातेहार में तब नक्सलियों द्वारा डीएसपी के खिलाफ पोस्टर भी जारी किए गए थे। घटना वर्ष 2005 से 07 के बीच की है। उस समय लातेहार में पुलिस प्रशासन का नहीं बल्कि नक्सलियों का दबदबा था। सरकार की काफी फजीहत हो रही थीतो डीएसपी ने खुद लातेहार जाने की इच्छा जाहिर की थी। सरकार ने उनकी बात मान ली और उन्हें भेजा गया था।

 अमरजीत ने राजद नेता ज्ञानचंद पांडेयबस मालिक सत्यवान सिंह के खिलाफ पोटा लगा दिया था। अनुसंधान के क्रम में इनके विरुद्ध आरोप प्रमाणित भी हुए थे। उस समय भी डीएसपी काफी चर्चा में आए थे। लातेहार में एक बार यह सूचना मिली थी कि नक्सली लातेहार थाना में अटैक कर सकते हैं। तब रात के डेढ़ बज रहे थे। एक हाथ में टार्च और दूसरे में राइफल लेकर वे खुद थाने पहुंच गए थे।

 बलिहार को तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी माना जाता रहा। उनकी इस काबिलियत को ही देखकर उन्हें मुख्यमंत्री सुरक्षा का भी प्रभारी बनाया गया था। ये जैप-1 में भी पदस्थापित रहे थे। बाद में जैप-2 के कमांडेंट बने थे। 17 मई को उन्हें पाकुड़ का एसपी बनाया गया था। राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार ने जैप-2 के कमांडेंट के पद से हटाकर उन्हें कहा था कि बड़ी जवाबदेही मिलने वाली है। उन्हें वैसे जिले का एसपी बनाया गयाजहां नक्सली सिर उठा रहे थे।

 पाकुड़ में जाते ही उन्होंने नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई भी शुरू कर दी थी। पांच नक्सली पकड़े गए थे। संथालपरगना के छह जिलों को शांत माना जाता है। नक्सली दुमका और पाकुड़ में क्षेत्र में विस्तार कर रहे हैं। बलिहार के पदस्थापन के बाद नक्सलियों को लगा कि हो सकता है उन्हें बैकफुट पर जाना पड़े। बलिहार विशेष शाखा में भी तैनात रह चुके थे।

 रांची आने का किया था वादा

आईपीएस अधिकारी अमरजीत बलिहार की गिनती राज्य के बेहतरीन पुलिस अफसरों में होती थी। मई 2013 में अधिकारियों को पोस्टिंग मिली तो पहली बार अमरजीत को बतौर एसपी पाकुड़ पोस्टिंग दी गई। सर्विस में पहली बार जिला एसपी की पोस्टिंग से वे काफी खुश थे।

 अमरजीत के चचेरे भाई सुधांशु बलिहार ने बताया कि पाकुड़ का माहौल अमरजीत को काफी अच्छा लगा था। वह कहता था कि दादा बहुत शांत हैं पाकुड़ के हमारे आवास में आम और लीची के पेड़ हैं। बड़ा अच्छा लगता है। वहीं अमरजीत के बचपन के दोस्त प्रोफेसर जयंत अग्रवाल ने कहा कि तीन चार दिन पहले अमरजीत से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने तब कहा था कि पाकुड़ का माहौल काफी अच्छा है।

रांची में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में भी तैनात रहे

एसपी अमरजीत बलिहार बिहार लोक सेवा आयोग के 31वें बैच (1986) से पुलिस सेवा में बहाल हुए थे। बहाली के बाद उनकी पहली पोस्टिंग जहानाबाद में हुई थी। इसके बाद मुंगेरखूंटीजहानाबादपटनाराजगीरहवेली खड़गपुरलातेहारचक्रधरपुर में बतौर डीएसपी तैनात रहे।

 साल 2003 में उन्हें आईपीएस कैडर मिला। इसके बाद उनकी पोस्टिंग रांची में हुई। रांची में वह पहले सीएम की सुरक्षा में रहे। फिर जैप-1 में डिप्टी कमांडेंटजैप-2 में कमांडेंट रहे। बतौर जिला एसपी मई 2013 में उनकी पहली पोस्टिंग पाकुड़ में हुई थी।

 घटना के थोड़ी देर पहले ही एसपी ने पत्नी से की थी

शांत स्वभाववादे और इरादे के पक्के एसपी अमरजीत बलिहार ने अंतिम समय में  भी पत्नी को किया वादा निभाया। घटना के दिन दोपहर दो बजे पत्नी सुमनलता ने बलिहार को फोन किया। हाल-चाल पूछा। बेटे अविनाश के बारे में पूछाबिटिया अपराजिता और शालिनी की पढ़ाई और खैरियत पूछी। पत्नी ने रांची आने की बात की तो जवाब दियाकल आ रहा हूं। अभी मीटिंग खत्म होने के बाद पाकुड़ जा रहा हूं। चंद लम्हों के बाद अमरजीत के शहीद होने की खबर ने परिवार को स्तब्ध कर दिया।

 शाम चार बजे तक सिल्ली (रांची) के डीएसपी आनंद जोसेफ तिग्गा सबसे पहले अमरजीत बलिहार के पत्थलकुदवा स्थित आवास पहुंचे। परिजनों को तब तक घटना की खबर नहीं थी। बाहर खड़े गार्ड और पड़ोस के परिचितों को घटना के बारे में बताया गया।

 बहरहाल, पाकुड़ जिले का गठन 1994 में साहेबगंज जिले से अलग कर बनाया गया था। यहां संथाल जनजाति के लोग बहुतायत में है। यहां 90 के दशक में कोल खनन  का काम शुरू हुआ। बताया जाता है कि यहां नक्सलियों का जबरदस्त प्रभाव है।