जेपीएससी परीक्षाओं की सीबीआई जांच।

जेपीएससी परीक्षाओं की सीबीआई जांच।

रांची। झारखंड को विकास और ईमान के रास्ते पर न्यायलय हीं ला सकती है। राज्य में जहां देखो वहां भ्रष्टाचार का बोलबाला है। जिसे मौका मिला लूट लिया। पिछले 12 सालों से लूट-खसोट जारी है।झारखंड उच्च न्यायालय ने झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन के अंतर्गत हुई सभी 16 परीक्षाओं की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया है।

इतना ही नहीं उच्च न्यायलय ने यह भी आदेश दिया है कि जेपीएससी के इन सोहल परीक्षाओं के माध्यम से जो लोग चुने गये हैं उन कर्मचारियों के वेतन भी रोक दी जाये। ये रोक तभी तक के लिये है जब तक सीबीआई के जांच पूरी नहीं हो जाती। इस वेतर रोक के आदेश से विकलांग महिला कर्मचारी को अलग रखा गया है।

झारखंड सरकार द्वारा इस अनियमिताओ के खिलाफ एक जनहीत याचिका दायर की गई थी। जेपीएससी के कामकाज पर उस समय अंगुलियां उठी जब उसकी परीक्षाओं में धांधली कर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और दोस्तों की नियुंक्तियां होने लगी।

पूरे मामले की मॉनिटरिंग खुद झारखंड हाई कोर्ट करेगी।हाई कोर्ट ने कड़ा रख अख्तियार करते हुए कहा कि जेपीएससी द्वारा बने 172 डिप्टी कलेक्टर का काम अभी से बंद किया जाये और उनकी सेलरी भी बंद किया जाये, जब तक की जाँच पूरी ना हो। इस दायेर में राज्य स्तर के लगभग सभी बड़े अधिकारी आ जाते हैं चाहे वह प्रशासनिक अधिकारी हों या पुलिस अधिकारी। जस्टिस आर के मराठिया और जस्टिस ड़ी एन उपाध्याय की बेंच ने सीबीआई को तीन महीने के अन्दर जाँच की स्टेटस रिपोर्ट भी देने को कहा है।

बड़े पैमाने पर अमियतताओं को देखते हुए बुद्धदेव उरावं ने एक जनहित याचिका दायर कर राज्य मे हुए सिविल सर्विसेस की परीक्षा मे घोटाले की जाँच सीबीआई से कराने की मांग की थी। इस मामले में आधे दर्जन से अधिक अधिकारी पहले ही गिरफ्तार भी हो चुके हैं।