ईपीएफ मुद्दे पर आखिरकार केन्द्र सरकार झुक गई।

ईपीएफ मुद्दे पर आखिरकार केन्द्र सरकार झुक गई।

नई दिल्ली:  ईपीएफ मुद्दे पर आखिरकार केन्द्र सरकार झुक ही गई।  ईपीएफ पर टैक्स लगाने के फैसले पर विपक्ष के विरोध के बाद सरकार ने यूटर्न लेते हुए इसे वापस ले लिया है। इसकी जानकारी संसद में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को दी है।वहीं, कांग्रेस उपाध्यक्ष ने इसे अपनी जीत करार दिया है।

बजट पेश होने के साथ ही ईपीएफ पर टैक्स की बात से सरकार की काफी किरकिरी हो रही थी। सरकार के फैसले के विरोध में सोमवार को कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन भी किया। विरोध के उग्र होते तेवर देखकर पीएम मोदी ने वित्तमंत्री से बात की थी और संकेत मिलने लगे थे कि इस मसले पर सरकार यूटर्न लेने के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि 29 फरवरी को पेश हुए बजट के बाद से ईपीएफ के 60 फीसदी हिस्से और इसके ब्याज पर टैक्स लगने को लेकर विरोध हो रहा है।

मंगलवार को जेटली ने लोकसभा में कहा कि सरकार इस प्रस्ताव की समीक्षा करना चाहती है और इसलिए वे इस प्रस्ताव को वापस ले रहे हैं। हालांकि नेशनल पेंशन स्कीम का 40 प्रतिशत पैसा निकालने पर अभी भी टैक्स नहीं लगेगा।

वहीं, इस मुद्दे पर अब सियासी फायदे नुकसान का गणित भी शुरू हो गया है और राहुल गांधी ने इसे अपने दबाव की रणनीति की सफलता करार दिया है।

राहुल गांधी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि आखिर में नौकरीपेशा लोगों की जीत हुई और सरकार को EPF टैक्स प्रस्ताव वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा। देर आए दुरुस्त आए। राहुल गांधी ने कहा कि वे सरकार के इस फैसले से खुश हैं क्योंकि अगर EPF निकासी पर टैक्स वसूला जाता तो यह निम्न वर्ग के लोगों के लिए परेशानी बनता।

राहुल गांधी ने कहा कि जब भी किसी को गलत तरीके से दबाने या किसी पर अत्याचार करने की कोशिश की जाती है तो मेरी कोशिश होती है, मैं ऐसे लोगों की मदद करूं। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने भी सरकार के फैसले पर कहा कि राहुल गांधी चाहते थे कि यह प्रस्ताव वापस लिया जाए। सरकार ने अच्छा कदम उठाया है।

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बैनर्जी ने भी ट्वीट के जरिए इसे अपने प्रयासों की जीत बताया है।