मुजफ्फरनगर हिंसा में 21 की मौत।

मुजफ्फरनगर हिंसा में 21 की मौत।

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही।  रविवार की सुबह भड़की ताजा हिंसा में 3 और लोगों के मारे गये। इसी के साथ मृतको की संख्या 21 तक पहुंच गई। इसकी की पुष्टि वहां के डीएम ने खुद की। मामले को नियंत्रण में लेने के लिये उपद्रवियों को गोली मारने के आदेश दिये गये हैं। 
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दंगों पर उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

सेना ने संभाली कमान
शुरुआत में इस पूरी घटना को लेकर लापरवाह बने रहे प्रशासन के अब होश उड़े हुए हैं। कर्फ्यू लगाने पर भी हालात काबू में न आने के बाद सेना बुला दी गई है। पीएसी की पांच कंपनियां और आरएएफ के जवान दंगा प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक मुजफ्फरनगर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में हिंसा की खबरें आ रही हैं। रविवार को सेना ने पूरे इलाके में फ्लैग मार्च किया। इसके अलावा सिविल लाइंस, कोतवाली और नई मंडी में कर्फ्यू लगाया गया है।

 27 अगस्त को कवाल गांव में युवती से छेड़छाड़ को लेकर हुई हिंसा में उसके 2 भाइयों की मौत हो गई थी। इसके बाद से ही पूरे मुजफ्फरनगर में दोनों समुदायों के बीच तनाव बना हुआ था। बीच-बीच में दोनों पक्षों के बीच हिंसा की छुटपुट घटनाएं भी हो रही थीं। लेकिन यूपी सरकार इस पूरे मामले में लापरवाह बनी रही। 

महापंचायत  - 
नवभारत टाइम्स के अनुसार दोषियों पर कार्रवाई न किए जाने से नाराज लोगों ने प्रशासन को चेतावनी देने के बाद शनिवार को नंगला मंदौड़ में महापंचायत आयोजित की थी। बताया जा रहा है कि पंचायत में जा रहे लोगों पर बसी गांव में दूसरे समुदाय के लोगों ने पथराव व फायरिंग कर दी। इसमें कई लोग घायल हो गए। इसके बाद भीड़ बेकाबू हो गई और इसने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। पुलिस के लिए काम कर रहे एक फोटोग्राफर इसरार को पीट-पीटकर मार डाला गया।

पत्रकार की हत्या - 
दंगे की आग में मुजफ्फरनगर ही नहीं मेरठ के हस्तिनापुर और रामराज इलाके भी झुलस गए। मुजफ्फरनगर के मीनाक्षी चौक, अबुपुरा, किदवईनगर, कृष्णापुरी, खादरवाला, शेरनगर समेत कई स्थानों पर दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। घंटों पथराव व फायरिंग हुई। अबुपुरा में घटना की कवरेज करने पहुंचे आईबीएन 7 के रिपोर्टर राजेश वर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जौली गंगनहर व मीरापुर के पास चार और तीन की अन्य स्थानों पर मौत हुई।

उत्तर प्रदेश में हाई एलर्ट – 
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूपी में हाई अलर्ट जारी करने के साथ ही मुजफ्फरपुर के तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। लेकिन हालात फिर भी नहीं संभले। इसके बाद स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील स्थानों पर सेना तैनात कर दी गई। बताया जा रहा है कि सेना तैनात होने के बाद भी हिंसा का यह सिलसिला रात में भी चलता रहा। मृतकों और घायलों की तादाद बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है। महापंचायत में सचिन-गौरव हत्याकाड के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और जेल भेजे गए समाज के लोगों की रिहाई की मांग की गई। बताया जा रहा है कि यूपी सरकार की बेरुखी और कथित वोट बैंक राजनीति मुजफ्फरनगर के जलने की वजह बताई जा रही है।

उत्तराखंड के यूपी से लगते जिलों में हाई अलर्ट
मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से सटे जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। हरिद्वार, देहरादून, उधमसिंह नगर में पुलिस को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

मुआवजे का ऐलान
उधर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर के हालात पर उनकी नजर है। उन्होंने हिंसा में मारे गए पत्रकार राजेश वर्मा के परिवार को 15 लाख और बाकी मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया।