चीन की वजह से खुशहाल रिश्तों में दरार। रूस ने चीन के साथ एस-400 करार को निलंबित किया।यदि चीन पाक को यह हथियार दे देता तो भारत के लिये मुश्किलें हो सकती थी : वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमार

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 चीन की वजह से खुशहाल रिश्तों में दरार। रूस ने चीन के साथ एस-400 करार को निलंबित किया।यदि चीन पाक को यह हथियार दे देता तो भारत के लिये मुश्किलें हो सकती थी : वरिष्ठ पत्रकार राजेश कुमार

विस्तारवादी मानसिकता वाला देश है चीन। भारत समेत तमाम सीमावर्ती देशों की जमीनें हड़पने की कोशिश करने वाला देश चीन अब खुद हीं अपने जाल में फंसता जा रहा है। कहा भी जाता है कि जब कोई व्यक्ति दूसरों के लिये गढ्ढा खनता है तब प्रकृति उसके लिये खाई तैयार कर देती है। यहीं होता जा रहा है कि चीन के साथ। अमेरिका से दुश्मनी करने वाला चीन ने अब अपने दो ताकतवर पड़ौसी देशों भारत और रूस से भी दुश्मनी मोल लिया है। भारत पर धोखे से हमले करने के बाद दोनो देश इन दिनों युद्ध की स्थिति में है। वहीं रूस ने भी चीन को भारी झटका दिया है। 

रूस ने मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 को लेकर चीन के साथ हुए करार को बिना कारण बताये निलंबित कर दिया है। यह भारत के लिहाज से हर स्तर पर अच्छी खबर है। एक तो चीन खुद एस-400 से लैस है और यदि वह यह हथियार पाकिस्तान के साथ शेयर करता को भारत को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था। खैर, यह चीन के लिये वैश्विक झटका है। क्योंकि माना जाता रहा है कि चीन को अप्रत्यक्ष रूस का समर्थन है इसलिये वह अमेरिका जैसे देश को भी चुनौती देने से नहीं डरता। कोरोना प्रकरण, चीन की धूर्तता और जासूसी की वजह से चीन दुनिया में अकेला पड़ता जा रहा है। 

भारत के बाद ताजा मामला है रूस के साथ चीन के संबंध में तकरार होना। एस-400 समझौते को रूस की ओर से तोड़ना कोई साधारण मामला नहीं है क्योंकि एस-400 ( S 400) दुनिया का सबसे खूंखार और ताकतवर मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। पहले वह अपने मित्र देश भारत को देना चाहता था लेकिन भारत के ठोस निर्णय के अभाव में उसने चीन को यह सिस्टम बेचा। इसी के दम पर वह दुनियां के सबसे ताकतवर देश को भी वह चुनौती देता रहा है। बहरहाल रूस ने चीन के साथ भले हीं यह करार तोड़ दिया हो लेकिन वह अपने मित्र देश भारत को आधुनिक एस 400 समय से पहले ही दे देगा। रूस ने चीन से एस 400 समझौता क्यों तोड़ा इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है अबतक लेकिन इसके कई कारणों का अनुमान लगाया जा रहा है जो निम्नलिखित है -

 1. चीन की विस्तारवादी नीति - चीन ने 1962 में भारत की जमीने हड़पने के बाद देश के अन्य क्षेत्रों पर भी दावा करने लगा है। इतना हीं नहीं वह रूस के शहर पर भी अपना दावा करने लगा है। 2 जुलाई को खबर आई कि चीन ने अब रूस के शहर व्लादिवोस्तोक पर अपना दावा किया है। और यह भी कहा कि इस शहर को पहले हैशेनवाई के नाम से जाना जाता था और एकतरफा सधि में रूस ने इसे छीन लिया था। रूस और चीन के बीच सीमा विवाद जारी है। हालांकि यह उनके बीच बहुत बड़ा विषय नहीं है लेकिन एक वजह तो हैं हीं। 

2. जासूसी प्रकरण : विश्व में अभी दो ही देश महाशक्तिशाली देश माना जाता है अमेरिका और रूस। कोल्डवार के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ (रूस) के बीच विश्व दो ग्रुपों में बंट गया था। सोवियत संघ के बिखरने के बाद अमेरिका पूरे विश्व का बादशाह बना। और समय के साथ चीन वैश्विक शक्ति बनने की कोशिश करने लगा। इस बीच राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में एक बार फिर रूस ने अपना गौरव हासिल कर लिया। लेकिन चीन आर्थिक और सामरिक क्षेत्र में अपनी ताकत बढाने में जुटा रहा। अमेरिकी टक्कर के लिये वह रूस से आधुनिक हथियार खरीदता भी रहा। इसी कड़ी में ताकतवर मिसाइल डिफेंस सिस्टम चीन ने रूस से खरीदा। लेकिन चीन को वह हैसियत प्राप्त नहीं है जो भारत को है। रूस भारत को सभी आधुनिक हथियार अपेक्षाकृत कम कीमत और तकनीक के साथ देता है लेकिन चीन को नहीं। इसलिये चीन जासूसी कर तकनीक चुराने पर लगा रहता है। अभी हाल हीं में रूस ने अपने एक वैज्ञानिक को चीन को गोपनीय सूचनाएं देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था।

3. आर्थिक प्रकरण : चीन व्यापार के साथ साथ सामरिक क्षेत्र में आगे बढने की पूरी कोशिश मे है। वह विश्व बाजार में अपना दबदबा चाहता है। इसी कड़ी में उसकी प्रतिस्पर्धा थी अमेरिका और यूरोप के देशों के साथ। यदि हथियार के क्षेत्र में भी यदि चीन आत्मनिर्भर हो जाता तो वह रूस को पीछे छोड़ने की कोशिश करता है। और सामरिक क्षेत्र में हथियार बेचने की कोशिश करता। शायद एक वजह यह भी है कि रूस अब अपने आधुनिका हथियार चीन को देने से बचने की कोशिश मे है।  एस-400 को निलंबित कर रूस ने चीन को झटका दिया है। लेकिन वास्तव में इसके अर्थ को समझना बहुत आसान नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि हथियार को देने के बाद चीन के लोग रूस आयेंगे और रूस के विशेषज्ञों को चीन जाना होगा। आज के दौर में जटिल है। रूस के फैसले के बाद कहा जा रहा है कि महामारी को देखते हुए इस तरह के फैसले लेने के लिये रूस को बाध्य किया गया।

जो भी हो भारत-चीन और चीन-अमेरिका के बीच तनाव जारी है। दोनों ही देश अपने अपने आधुनिक हथियारों को तैनात करने में जुटे हैं ऐसे समय में रूस द्धारा चीन को एस 400 नहीं देने का निर्णय चीन के खिलाफ रूस का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  रूसी हथियार के दो बड़े खरीददार है भारत और चीन। लेकिन दोनो हीं देशों में अंतर है। पहला भारत सबसे बड़ा खरीददार होने के  साथ साथ कई हथियारों का विकास संयुक्त रूप से कर रह है। भारत और रूस के बीच कभी किसी विषय पर विवाद नहीं रहा और रूस ने सदैव वैश्विक स्तर पर भारत का साथ दिया। अभी कुछ साल पहले की बात है कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था तब रूस ने यहां तक कह दिया था उसे जम्मू-कश्मीर पहुंचने में समय नहीं लगेगा। यानी हर स्तर पर रूस भारत के साथ है। 

बहरहाल एक अनुमान यह भी है कि भारत और चीन के बीच भारी तनाव है। कोई नहीं जानता कि कब किस वजह से युद्ध भड़क उठे। भारत को दूसरी ओर से घेरने के लिये पाकिस्तान चीन के साथ खड़ा है। यदि ऐसे में रूस से प्राप्त मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 चीन ने पाकिस्तान के साथ शेयर किया तो भारत के लिये भारी खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में रूस ने चीन के साथ एस 400 को निलंबित कर भारत की मदद की है। 

 

नोट - लेखक राजेश कुमार ग्लोबल खबर के संपादक हैं। साथ हीं राजनीति, सामाजिक और विदेश मामलों के जानकार हैं।