तमिलनाडु : करुणानिधि को लाखों लोगो ने नम आंखों से विदाई दी। अलविदा !

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तमिलनाडु : करुणानिधि को लाखों लोगो ने नम आंखों से विदाई दी। अलविदा !

(टाइम्स ख़बर) तमिलनाडु के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता एम करुणानीधि को आज लाखों लोगों ने नम आंखों से विदाई दी। उनके पार्थिव शरीर को चेन्नई के मरीना बीच पर दफनाया गया। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।  इस मौके पर एक तरह से शहर में जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुला समेत दर्जनों हस्तियां चेन्नई पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर बेटे एम के स्टालीन, एम के अलागिरी और बेटी कनिमोई समेत पूरा परिवार मौजूद था।उन्हें उनके गुरु अन्नादुरई के पास ही मरीना बीच पर समाधि दी गई। पूरा माहौल गमगीन था। थलाइवा के नारों से आकाश गूंज उठा। प्रशंसक फूट फूट कर रोते -विलखते रहे। 

 इस बीच भारी विवाद भी हुआ। सत्तारूढ एआईडीएमके की सरकार ने मरीना बीच पर दफनाने की इजाजत नहीं दी। इससे उनके प्रशंसको में भारी रोष पैदा हो गया। हिंसा के संकेत आने लगे। मामला अदालत पहुंचा। समर्थकों के भारी तदाद को देखते हुए 7 अगस्त की रात से ही मद्रास हाईकोर्ट ने सुनवाई शुरू की। और आठ अगस्त के सुबह तक जारी रहा। और अदालत ने मंजूरी दे दी। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका  खारिज कर दी।  शाम चार बजे उनकी शव यात्रा शुरू हुई और शाम 7 बजे उन्हें समाधि दी गई। जिस ताबूत में रखकर उन्हें दफनाया गया उसपर लिखा था "एक शख्स जो बिना आराम किये काम करता रहा, अब वह आराम कर रहा है।" ये बाते पांच बार मुख्यमंत्री रहे करुणानिधि ने 33 साल पहले लिखा था।  

इस दौरान मरीना बीच पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू मौजूद रहे।

 - जन्म 3 जून 1924 को तमिलनाडु के तिरुक्कूवलई में हुआ था। और निधन 8 अगस्त 2018 को चेन्नई स्थित कावेरी होस्पिटल में।

- 94 वर्षीय द्रविड़ योद्धा डीएमके के अध्यक्ष रहे। वे लगभग 60 साल तक राजनीति में सक्रिय रहे और राज्य की सियासत उनके ईर्दगिर्द ही घूमती रही। 

- द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के संस्थापक सी.एन.अन्नादुरई का निधन साल 1969 में हुआ। इसके बाद पार्टी का बागडोर करूणानिधि ने संभाली और ताउम्र इसके अध्यक्ष रहे। 

- तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहने वाले करुणानिधि राज्य की राजनीति के केंद्र बिन्दु थे।  इनके समर्थक इन्हें प्यार कलाईनार कहते थे यानी कला का विद्धान। 

- 1938 : इनकी बचपन से ही द्रविड़ आंदोलन से प्रभावित थे और पहली बार 14 साल की उम्र में आंदोलन में हिस्सा लिया था। वे अलागिरिस्वामी के भाषणों से प्रभावित होकर साल 1938 में ही जस्टिस पार्टी से जुड गये थे।

- 1949 : सी.एन.अन्नादुरई ने अपने राजनीतिक गुरू ई.वी.स्वामी से अलग होकर 1949 में डीएमके की स्थापना की। तबसे करुणानिधि उनके साथ थे।वे संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।

-1957: करूर जिले स्थित कुलिथली विधान सभा सीट से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे।

- 1962 में विधान सभा में विपक्ष के उपनेता बने।

- 1967 में वे पहली बार अन्नादुरई सरकार में मंत्री बने। इस साल पूरे राज्य में हिंदी भाषा थोपने जाने  के विरोध को लेकर आंदोलन चरम पर था।

- 1969 में अन्नादुरई की मृत्यु हो गई। वे कैंसर से पीडि़त थे। उनके निधन के बाद करूणानिधि मुख्यमंत्री बनने के साथ साथ पार्टी के अध्यक्ष और संरक्षक भी बने। तबसे वे आजीवन पार्टी अध्यक्ष रहे। 

- वे पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे। साल 1969-71, 1971-76, 1989-91, 1996-2001 और 2006-2011 तक 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे।

- वे 94 साल के थे। इतने वर्षो तक राजनीति में सक्रिय रहे। डॉक्टर का कहना है कि वे सुबह जल्दी उठ जाते थे और योग करते थे। काफी पैदल चलते थे। साधारण भोजन करते थे। स्वस्थ जीवन शैली थी।