कारगिल युद्ध : जमीन से पहाड की चोटियों पर पहुंच पाकिस्तानी सेना को धूल चटाया। गौरवशाली भारतीय सेना पर गर्व है देश को।

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कारगिल युद्ध : जमीन से पहाड की चोटियों पर पहुंच पाकिस्तानी सेना को धूल चटाया। गौरवशाली भारतीय सेना पर गर्व है देश को।

(राजेश कुमार, ग्लोबल ख़बर)। आज ही के दिन यानी 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सेना को नेस्तनाबूद कर कारगिल में पुन: तिरंगा लहराया और अपनी धरती को पाकिस्तान की सेना और आतंकवादियों से मुक्त कराया। ये हम सभी के लिये गौरव का दिन है। हम भारतवासी अपने बहादुर सैनिको पर गर्व महसूस करते हुए आज के दिन को विजय दिवस के रूप में मनाते हैं। कारगिल युद्ध गवाह है कि किस प्रकार पाकिस्तान ने भारत के साथ गद्दारी की। और धोखे से हमारी जमीन पर कब्ज जमा लिया था। लेकिन देश के योद्धाओं ने बर्फीली तूफानों और पाकिस्तानी हमले का सामना करते हुए पाकिस्तानी सेनाओं का खात्मा किया। भारतीय सेना की विशेषता है कि यदि एक बार कदम आगे बढ गये तो बढ गये। वे रूकते नहीं चाहे सामने कोई भो हो। 

यह युद्ध आसान नहीं था। दुनियां की सबसे ऊंची चोटी पर भारतीय सेना ने युद्ध लडी। लगभग 18 हजार फीट ऊपर। जो दिक्कतों का सामना भारतीय सेना को करना पड़ा वह पाकिस्तानी सेना को नहीं क्योंकि पाकिस्तान की सेना और आतंकवादी धोखे से कारगिल की चोटियों पर पहुंच अपना ठिकाना बना चुके थे। युद्ध शुरू होने से कई महीने पहले ही पाकिस्तान सेना और आतंकियों ने पहाड की चोटियों पर गोला-बारूद लेकर पोजिशन ले चुके थे। यानी भारतीय इलाके पर कब्जा कर लिया था। भारत की ओर से अपनी जमीन को छुड़ाने के ऐलान के बाद भारतीय सेना को जमीन-तल से चोटियों पर पहुंचना था। ठंड इतनी की रूह कांप जाये। फिर भी भारतीय योद्धाओं ने हिम्मत नहीं हारी और पाकिस्तानी सेना को करारी हार का सामना करना पड़ा। 

- केंद्र में एनडीए की सरकार थी। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे और रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्णाडीज।

- 3 मई 1999 : कश्मीर के एक चरवाहे ने भारतीय सेना को सूचना दी कि पाकिस्तान की सेना करिगल में घुसपेठ कर चुकी है। 

- 5 मई : भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम जानकारी लेने कारगिल पहुंची तो पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ लिया और उनमें से 5 की हत्या कर दी।

9 मई : पाकिस्तानियों की गोलाबारी से भारतीय सेना का कारगिल में मौजूद गोला बारूद का स्टोर नष्ट हो गया।

10 मई : पहली बार लद्दाख का प्रवेश द्वार यानी द्रास, काकसार और मुश्कोह सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखा गया।

26 मई : भारतीय वायुसेना को कार्यवाही के लिए आदेश दिया गया।

27 मई : कार्यवाही में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 जैसे युद्धक विमान का भी इस्तेमाल किया।   

यह एक ऐहितासिक युद्ध था। इस युद्ध में आसमान से हमारे लड़ाकू विमान गरजना कर रहे थे तो जमीन से बोफोर्स की तोपें आग उगल रही थी। सभी लोग आश्चर्यचकित थे। बोफोर्स ने युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई। युद्ध से जुड़ी कई बाते है जिस पर हमें गर्व होता है। यदि इस युद्ध में 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए। बड़ी संख्या में घायल। पाकिस्तानी सेना को जबरदस्त क्षति पहुंची। हजारों की संख्या में उसके सैनिक मारे गये। 

भारत और पाकिस्तान के बीच यह चौथा युद्ध था। लेकिन यह युद्ध एक मायने में पहले के सभी युद्ध से अधिक खतरनाक था क्योंकि एक साल पहले ही पाकिस्तान ने परमामु बम की क्षमता हासिल की थी। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष परवेज मुशर्रफ ने ही इस युद्ध को पाकिस्तान की ओर से लीड किया था। उस समय भारत के सेना अध्यक्ष थे जनरल वी पी मलिक। उन्होंने कौशल रणनीति का परिचय दिया और भारत की जीत हुई।

दरअसल कारगिल में जब भारी हिमपात होता है तो दोनों देश अपनी अपनी सेनाओं को चोटियों से हटा लेते हैं। यह परंपरा वर्षो से जारी था। इसी का फायदा उठाकर धोखे से पाकिस्तान ने भारतीय जमीन पर कब्जा करना शुरू किया। उस समय चोटियों पर भारतीय रक्षक नहीं थे। जब इसकी सूचना मिली तब जाकर ऑपरेशन विजय शुरू किया गया।