कैसे होता है भारत में राष्ट्रपति का चुनाव।

कैसे होता है भारत में राष्ट्रपति का चुनाव।

कैसे होता है भारत में राष्ट्रपति का चुनाव।
लेखक - राजेश कुमार
19 जुलाई को भारत के राष्ट्रपति का चुनाव होना है। और 22 जुलाई को वोटो की गिनती होगी। हालांकि यह तय माना जा रहा है कि यूपीए उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी चुनाव जीत जायेंगे। उनके टक्कर में बीजेपी उम्मीदवार पी ए संगमा हैं। भारत का राष्ट्रपति चुनाव देश के आम चुनाव से एकदम अलग है। जहां आम चुनाव में देश की जनता भाग लेती है वहीं राष्ट्रपति के चुनाव में आम जनता द्धारा चुने हुए प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं।

ये प्रतिनिधि इलेक्टोरेल कॉलेज के सद्स्य होते हैं। इस चुनाव की बारीकियों से बहुत सारे लोगो अनभिज्ञ हैं। इसलिये राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है? इसमें कौन लोग हिस्सा लेते हैं? इस बारे में जानना बेहद जरूरी होगा। –

अप्रत्यक्ष चुनाव – भारत के राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष (इनडाइरेक्ट) होता है। जनता सीधे वोट कर भारत के राष्ट्रपति का चुनाव नहीं करती है बल्कि मतदाताओं द्धारा चुने हुए लोग राष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा लेते हैं। यानि राष्ट्रपति के चुनाव के लिये एक निर्वाचक मंडल होता है जिसे इलेक्ट्रोरल कॉलेज कहते हैं।

वोट देने का अधिकार – राष्ट्रपति के चुनाव में देश के सभी राज्यों के विधानसभाओं के चुने विधायक और लोकसभा तथा राज्यसभा के लिये चुनकर आये सांसद वोट डालते हैं। यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि राष्ट्रपति द्धारा नॉमिनेटेड सांसद हिस्सा नही ले सकते हैं । इतना हीं राज्यों में भी जो विधायक विधान परिषद के सदस्य हैं यानी जनता द्धारा चुने हुए नहीं हैं, इसलिये ये भी वोट नहीं डाल सकेंगे।

एक से अधिक उम्मीदवार को वोट देने का अधिकार - आम चुनाव में मतदाता किसी एक ही उम्मीदवार को अपना मत देता है। लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में मतदाता सभी उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करता है लेकिन उसे मत देते समय प्राथमिकता देनी होती है कि उसकी पहली पंसद का उम्मीदवार कौन है, दूसरी कौन है, तीसरी कौन है, चौथी कौन हैं .....। इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम भी कहते हैं। यदि पहली पंसद के वोट से उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाता है तो फिर दूसरी पंसद के वोट को जोड़ा जाता है उससे भी फैसला नहीं होता है तो तीसरी पंसद के वोट को जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया तबतक जारी रहती है जबतक किसी उम्मीदवार को पचास प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिल जाता।

नुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था – सांसदों और विधायकों के वोटों का महत्व अलग अलग होता है। इतना हीं नहीं दो राज्यों के विधायकों के वोटों का महत्व भी अलग अलग होता है। यह महत्व कितना होगा और कैसे होगा, ये जिस प्रकार तय किया जाता है उसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था कहते हैं।

विधायकों के वोटो का मह्त्व – एक विधायक के वोट का महत्व, उस राज्य की आबादी और विधान सभा के सदस्यों की संख्या पर निर्भर करता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक विधायक का वोट कितना होगा? इसे जानने के लिये निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है।

- राज्य की जनसंख्या को जनता द्धारा जितने चुने हुए विधायक हैं उससे भाग(डिवाइड) किया जाता है।
- राज्य की जनसंख्या को चुने हुए विधायकों द्दारा भाग देने के बाद जो नंबर आता है फिर उसे एक हजार से भाग किया जाता है। इसके बाद जो आकड़ा आता है उसे एक विधायक का वोट माना जाता है।
- मान लिजिये किसी राज्य के एक विधायक का वोट 1000 है तो उसका वेल्यू भी एक हजार होगा। लेकिन मान लिजिये भाग देने पर शेष 500 से कम हो तो भी वेल्यू 1000 ही रहेगा। लेकिन शेष 500 से ज्यादा हो तो वेल्यू में एक जोड़ दिया जाता है यानी वोट का मह्तव 1001 हो जायेगा।
- उपरोक्त बातों से साफ है कि हर राज्य के विधायकों के वोटो का महत्व अलग अलग है।

सांसदों के वोटो का महत्व – सांसदों के वोटों का महत्व कितना होगा, इसकी प्रक्रिया विधायकों के लिये अपनाये गये नियमों से एकदम अलग है। इसे जानने के लिये निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना जरूरी होगा।

- देश के सभी विधान सभाओं के चुने हुए विधायकों के वोटों के मूल्यों जोड़ा जाता है। जो भी कुल मूल्य प्राप्त होता है उसे लोकसभा और राज्य सभा के चुने हुए सदस्यों( सांसदों) के कुल संख्या से भाग(डिवाइड) किया जाता है। इस तरह जो नंबर प्राप्त होता है वह एक सांसद के वोट का महत्व होता है। अगर भाग देने के बाद शेष 0.5 से ज्यादा बचता है तो सांसद के वोट में एक और अंक जोड़ दिया जाता है। जीत कैसे हासिल होती है – जैसे विधान सभा या लोक सभा के चुनाव में जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट हासिल होता है उसे विजयी घोषित किया जाता है लेकिन राष्ट्रपति के चुनाव में ऐसा नहीं होता है। यहां उसी उम्मीदवार को विजयी घोषित किया जाता है जिसे पचास प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त हो। अब मान लिजिये किसी उम्मीदवार को पचास प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में भारत के संविधान में क्या नियम है राष्ट्रपति को चुनने के। इसके लिये व्यवस्था की गई है। आइये निम्नलिखित बातों पर गौर करें -- वर्तमान में राष्ट्रपति चुनाव के लिये जो चुने हुए मतदाता हैं यानी इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य हैं उनके वोटो का कुल महत्व 10,98,882 है। तो जीत के लिये कम से कम एक उम्मीवार को 5,49,442 वोट हासिल करने होंगे। यह आंकड़ा जो उम्मीदावर सबसे पहले हासिल कर लेगा उसे मिल जायेगा।
- मान लिजिये चार उम्मीदवार हैं और किसी को भी आधे से अधिक मत प्राप्त नहीं हुआ तो क्या होगा? इसके लिये चुनाव में प्राथमिकता (प्रायोरिटी) की व्यवस्था है। वोटर को हर उम्मीदवार को वोट देना होता है। लेकिन उसे चुनना होता है कि उनकी पहली पसंद कौन है, दूसरी कौन है, तीसरी कौन है, चौथी कौन है या इससे अधिक है तो उसको भी प्रथामिकता देनी होती है।
- मान लिजिये किसी भी उम्मीदवार को आधे से अधिक मत प्राप्त नहीं हुए तो ऐसी स्थिति में उस उम्मीदवार को राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ से बाहर कर दिया जाता है, जिन्हें सबसे कम वोट प्राप्त होता है। और उनकी दूसरी पंसद के वोट बचे हुए उम्मीदवारों को दे दिया जाता है। इस ट्रांसफर वोट से किसी उम्मीदवार को कुल मत के आधे से अधिक वोट प्राप्त हो जाते हैं तो उसे विजयी घोषित किया जाता है। यदि इससे भी फैसला नहीं होता है तो फिर वहीं प्रक्रिया अपनाई जाती है। मान लिजिये कभी ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि वोट ट्रांसफर के बाद सबसे कम में दो उम्मीदवारों के वोट बराबर हो गये तो उस उम्मीदवार को बाहर होना पड़ता है जिन्हें फस्ट राउंड में कम वोट मिले थे।

बहरहाल वोट ट्रांसफर की प्रक्रिया तब तक अपनाई जाती है जबतक किसी उम्मीदवार को कुल वोट के आधे से अधिक मत प्राप्त न हो जाये।

आइये एक नजर डालते हैं कुछ महत्वपूर्ण बातों पर –

- लोक सभा में कुल सांसदो की संख्या 545 है। इनमें से दो सदस्य नॉमिनेटेड होते हैं। इन दो सांसदों को राष्ट्रपति चुनाव में वोट करने का अधिकार नहीं होता।
- राज्य सभा में सांसदों की कुल संख्या 245 है। इनमें से 12 सदस्य नॉमिनेटेड होते हैं। इन नॉमिनेटेड सदस्यों को राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं होता है।
- देश के सभी राज्यों के विधान सभा विधायकों के चुने हुए विधायकों की संख्या 4120 है।
- लोकसभा, राज्य सभा और देश के कुल सभी विधान सभा को मिलाकर चुने हुए सदस्यों की संख्या यानी कुल मतदाताओं की संख्या 4,896 है।
- वर्तमान में देश के कुल चुने हुए 776 सांसदो (लोकसभा और राज्य सभा) के कुल मतों की संख्या - 5,49,408 है। और देश के कुल चुने हुए विधायकों के वोटों की संख्या – 5,49,474 है।