विश्वास मत हासिल किया मुख्यमंत्री हेमंत ने ।

विश्वास मत हासिल किया मुख्यमंत्री हेमंत ने ।

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया है। सरकार के पक्ष में 43 और विरोध में 37 वोट पड़े। इस मौके पर हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के विकास के लिये सभी लोगों की मदद की जरूरत है। साथ हीं उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी गठबंधन की सरकार इस विधान सभा के बचे 16 महीने का कार्यकाल पूरा करेगी।   

हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बने इस गठबंधन की सरकार में कांग्रेस, राजद, मासस के अरूप चटर्जी और निर्दलियों के समर्थन से सरकार बनी है। सरकार में झामुमो के 18,  कांग्रेस के 13,  राजद के 05,  मासस के 01 और 6 निर्दलीय विधायक शामिल हैं। वहीं भाजपा के 17, आजसू के 06, जदयू के 2 , भाकपा माले के 01 और एक मनोनीत विधायक ने विश्वासमत के विरोध में वोट दिया। झारखंड विकास मोर्चा ने भी खिलाप में वोट किया।

इससे पहले पिछले 9 जुलाई को हेमंत सोरेन ने 43 विधायकों का समर्थन पत्र लेकर राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया था। 13 जुलाई को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हेमंत सोरेन के साथ कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद सिंह और राजद की अन्नपूर्णा देवी ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी।

बहुमत प्राप्त होने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द ही किया जायेगा। मुख्यमंत्री समेत कुल 12 मंत्री बनाये जाने हैं। अभी और 9 लोगो को मंत्री बनाये जाने हैं।

इससे पहले राज्य में झामुमो और बीजेपी गठबंधन की सरकार थी लेकिन मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर झामुमो ने 7 जनवरी को समर्थन वापस ले लिया। उस समय बीजेपी नेता अर्जन मुंडे के नेतृत्व में सरकार बनी थी। इस सरकार में झामुमो व बीजेपी के अलावा आजसू और जदयू का समर्थन था। बताया जाता है कि जब झामुमो और बीजेपी के बीच समझौता हुआ था उस समय बीजेपी ने यह आश्वासन दिया था कि आधे समय बीजेपा का मुख्यमंत्री होगा और आधे समय झामुमो का लेकिन जब झामुमो के नेतृत्व मे सरकार बनाने की बात आई तो बीजेपी ने साफ कहा कि ऐसा कोई समझौता नही हुआ है। वहीं झामुमो का कहना था कि ऐसा ही समझौता हुआ था। और इसके प्रमाण मौजूद हैं।

बहरहाल बीजेपी के न मानने पर झामुमो ने वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए अर्जुन मुंडा की सरकार से समर्थन वापस ले लिया। उस समय कोई भी पार्टी या गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं था इसलिये 17 जनवरी को राष्ट्रपति शासन लागू हुआ।

राष्ट्रपति शासन लागू होने से छह महीने पहले ही झामुमो ने कांग्रेस से बातचीत कर राज्य में सरकार बनाने की पहल कर दी। बताया जाता है कि झारखंड में सरकार बनाने से पहले कांग्रसे और झारखंड के बीच यह तय हुआ है कि लोकसभा के चुनाव में झारखंड की कुल 14 लोकसभा सीटों में से 10 सीटों पर कांग्रेस और 4 सीटों पर झामुमो चुनाव लडेगी। लेकिन यह भी खबर सामने आ रही है कि कुल 14 लोकसभा सीटों में से 8 पर कांग्रेस, 4 पर झामुमो और 2 सीटो पर राजद चुनाव लडेगी।

जानकारों का कहना है कि यदि कांग्रेस, झामुमो और राजद ने मिलकर चुनाव लड लिया तो 14 के 14 लोकसभा सीटों पर यह गठबंधन जीत हासिल कर लेगी।