प्राकृतिक प्रकोप के कारण हजारों जाने गई उत्तराखंड में।

प्राकृतिक प्रकोप के कारण हजारों जाने गई उत्तराखंड में।

उत्तराखंड में बारिश और उसके बाद आये बाढ में हजारों लोगों की जाने चली गई है। सरकारी आंकड़े 71 के आसपास है लेकिन जो यात्रियो से बातचीत के बाद रिपोर्टें आ रही हैं उसके अनुसार हजारों की मौत हो चुकी है। हालात ऐसे हीं की मरने वालों का अभी सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है। लेकिन मृतकों की संख्या हजारों मे है। गांव के गांव बह गये है।

 उफनती नदियों ने किनारे पर बसे शहर, घर व होटल सभी को बहा ले गये। पहाडों के टूटने और अपने बचाव में ऊंची घाटियों से पार करते समय भी कई जाने चली गई। अभी भी लगभग 60 हजार से अधिक सैलानी फंसे हुए हैं। सैलानियों को बचाने में जुटे हैं भारतीय सैनिक। वे उनके लिये देवदूत बनकर आये गये।

 

 उत्तराखंड में 16 जून की रात हुई भारी बारिश, बादल फटने, पहाड़ों का टूटना और और नदियों में आई अचानक बाढ की खौफनाक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। ऐसा लगता है कि प्रकृति ने उत्तराखंड को नेस्तनाबूद कर दिया है। इसे बीते 100 साल का सबसे बड़ा कुदरती आपदा माना जा रहा है।

  - केदारनाथ में कुदरत का कहर ऐसा हुआ कि सबकुछ तबाह हो गया। रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ मंदिर और इसके आसपास के इलाकों के 90 धर्मशालाएं बह गई हैं, जिसमें ढेर सारे तीर्थयात्री ठहरे हुए थे। सिर्फ मंदिर ही बचा है।

 

 - उत्तरकाशी से गंगोत्री तक के पूरे इलाके में सबसे ज्यादा मार पड़ी है। यहां बड़े पैमाने पर पहाड़ गिरे हैं। अलकनंदा घाटी का बेहद बुरा हाल है। केदारनाथ मंदिर के पास गौरीकुंड से लेकर मंदाकिनी नदी के किनारे−किनारे रुद्रप्रयाग तक का इलाका तबाह हो गया है।

- बिगड़ते मौसम के कारण राहत और बचाव के कामों में काफी दिक्कते आ रही है फिर भी भारतयीसेना और अर्द्दसैनिक बलों के जवान डटे हुए है। हिमालय के ऊंची पहाड़ियों और घाटियों के बीच फंसे लोगों को बचाने और राहत सामाग्री पहुंचाने में सेना और अर्द्दसैनिक बलों की टीमों के अलावा बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन और आईटीबीपी के जवानो को तैनात किया गया है। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉस टीम भी जुट गई है।

 

- पहले 12 हेलीकॉप्टर लगाये गये। फिर 8 और हेलीकॉप्टर लगाये गये। जैसे जैसे जरूरत हो रही है वैसे वैसे हेलीकॉप्टर की संख्या बढायी जा रही है।

- प्रधानमंत्री ने अंतरिम राहत के तौर पर उत्तराखंड को एक हजार करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है। उत्तराखंड  सरकार के मुताबिक 500 सड़कें और कम से से कम 175 पुल बाढ़ के पानी में बह गए हैं।

 

 - राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी ने कहा है कि राज्य में सुनामी जैसे हालात हैं और पुनर्वास तथा और पुनर्निर्माण में कई महीने तक लग सकते हैं। जो तस्वीरें सामने आईं हैं, उसमें पिथौरागढ़ में कटाव और जमीन खिसकने के चलते बड़ी संख्या में घर तबाह होते दिखाई दे रहे हैं।

 

- मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के मुताबिक रुद्रप्रयाग सबसे बुरी तरह प्रभावित है। अल्मोड़ा में भी जमीन खिसकने के चलते नेशनल हाइवे-87 पूरी बंद पड़ा है। भूस्खलन के बाद रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है, जिसे जेसीबी मशीन की मदद से साफ करने की कोशिश की जा रही है।

 

- सड़क टूटने से राहत और बचाव के काम में काफी दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि राहत पहुंचाने के लिए सेना ने एक वैकल्पिक रास्ता तैयार किया है। बचाव और राहत अभियान को तेज करते हुए उत्तराखंड में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने में 22 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं।

 

 

बहरहाल 16 जून की रात हुई भारी बारिश के कारण हजारों जाने जा चुकी है। समय के साथ साथ सही जानकारी मिल पायेगी। लेकिन जो नुकसान हुआ है उसका आकलन लगाना बहुत मुश्किल है। वहां देश भर से यात्री गये हुए थे कोई घुमने गया हुआ था तो कोई धार्मिक यात्रा पर थे।